शिकागो का ऐतिहासिक भाषण: जब दुनिया खड़ी हो गई
साल था 1893। जगह थी शिकागो, अमेरिका — विश्व धर्म संसद।
जब स्वामी विवेकानंद मंच पर आए और उन्होंने कहा:
“My brothers and sisters of America…”
तो पूरी सभा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी।
उस दिन भारत ने दुनिया को दिखा दिया:
हम सिर्फ गरीब नहीं हैं… हम महान हैं।
इस एक भाषण ने स्वामी विवेकानंद को पूरी दुनिया में प्रसिद्ध कर दिया और भारत को एक नई पहचान मिली।
शिकागो का ऐतिहासिक भाषण: जब दुनिया खड़ी हो गई
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🏛️ रामकृष्ण मिशन: सेवा ही साधना
स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य था:
“नर सेवा ही नारायण सेवा है।”
आज भी यह मिशन:
- गरीबों को भोजन देता है
- बच्चों को शिक्षा देता है
- बीमारों का इलाज करता है
- और हज़ारों लोगों की ज़िंदगी बदल रहा है
🌟 स्वामी विवेकानंद के विचार: आज भी उतने ही जीवित
उनका सबसे प्रसिद्ध विचार आज भी युवाओं में जोश भर देता है:
“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”
और एक और अमर वाक्य:
“तुम अमृत के पुत्र हो, कमजोर नहीं हो।”
😔 अल्पायु में महाप्रस्थान, लेकिन अमर विचार
सिर्फ 39 वर्ष की उम्र में, 4 जुलाई 1902 को, स्वामी विवेकानंद इस दुनिया से चले गए।
पूरा देश शोक में डूब गया।
लेकिन…
उनका शरीर गया, उनके विचार नहीं।
आज भी उनके विचार जीवित हैं।
😔 निष्कर्ष: आज के भारत के लिए संदेश
स्वामी विवेकानंद हमें सिखाते हैं कि:
-
खुद पर विश्वास करो
-
अपने देश पर गर्व करो
-
और समाज के लिए जियो
आज जब भारत फिर से विश्व मंच पर आगे बढ़ रहा है, तो स्वामी विवेकानंद के विचार हमें सही दिशा दिखाते हैं।
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